Hindi Story

गरीब पिता की पुकार – एक अनजान रहनुमा बना भगवान!


🎙️ [Narrator – बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ धीमे भावुक अंदाज़ में]
बहुत समय पहले की बात है, शिवपुर नाम के एक छोटे से गांव में राजू नाम का एक ईमानदार और मेहनती मजदूर अपनी पत्नी सविता और 8 साल के बेटे अनमोल के साथ रहा करता थ


🧑‍🌾 राजू:
“सविता, पिछली बरसात ने तो हमें बहुत परेशान किया था। अगर इस बार भी छत नहीं बनवाई तो सारा सामान भीग जाएगा।”

👩‍🦱 सविता:
“हां जी, छत जगह-जगह से टपक रही है। अगर जल्द कुछ नहीं किया तो हाल और भी बुरा हो जाएगा।”

🎙️ [Narrator]
राजू ईमानदारी से काम करता था, लेकिन हालात ने उसे मुश्किल में डाल दिया था। फैक्ट्री घाटे में चल रही थी, और मालिक ने काम से निकाल दिया।


🏭 फैक्ट्री मालिक ( श्रीवास्तव साहब):
“राजू, फैक्ट्री बंद करनी पड़ी है… तुम कहीं और काम देख लो।”

🎙️ [Narrator]
राजू का दिल टूट गया। काम चला गया, छत टूटी हुई, और जेब में एक भी पैसा नहीं…


🎙️ [Narrator]
राजू मदद की उम्मीद लिए बाजार गया, हर किसी से काम मांगा, लेकिन हर जगह से इनकार ही मिला…


👨‍🍳 मछली वाला ( कालिया भाई):
“भैया, काम तो मेरे पास भी नहीं है… खुद के लिए ही मुश्किल से कमा रहा हूं।”


🎙️ [Narrator]
बारिश तेज़ होती गई, और राजू के घर की हालत और बिगड़ती गई। बेटा अनमोल बीमार पड़ा… बुखार से कांपता हुआ।


👩‍🦱 सविता:
“राजू जी, अब तो बेटे की हालत बिगड़ रही है। कहीं से उधार ले आइए।”

🎙️ [Narrator]
राजू अपने बचपन के दोस्त मोहन के पास गया, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी।


👨‍🦰 मोहन:
“राजू भाई, मेरी हालत भी ठीक नहीं है, मैं मदद नहीं कर सकता।”

🎙️ [Narrator]
जब अपनों से भी सहारा नहीं मिला, तो राजू आखिरी उम्मीद लिए गांव के सरपंच हरिराम जी के पास गया…


👴 सरपंच हरिराम:
“राजू, मुझे माफ करना… इस बार कोई सरकारी फंड नहीं आया है। मैं मदद नहीं कर पाऊंगा।”

🎙️ [Narrator]
थका-हारा राजू लौट रहा था, तभी एक पेड़ से गिरी टहनी ने उसे घायल कर दिया… और वह वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा।


🎙️ [Narrator – पृष्ठभूमि में तेज़ बारिश का साउंड इफेक्ट]
अगले दिन एक व्यापारी अशोक भैया उस रास्ते से गुजर रहे थे… और उन्होंने राजू को घायल अवस्था में देखा…


👔 अशोक भैया:
“अरे भाई! ये तो बेहोश है… इसे ऐसे नहीं छोड़ सकता।”

🎙️ [Narrator]
अशोक भैया ने राजू को अपने घर ले जाकर उसकी सेवा की… जब राजू को होश आया…


🧑‍🌾 राजू:
“आपने मेरी मदद क्यों की… आप तो मुझे जानते भी नहीं थे…”

👔 अशोक भैया:
“भाई, इस दुनिया में अच्छाई अब भी ज़िंदा है। हम सबको एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।”

🎙️ [Narrator]
अशोक भैया ने राजू को बेटे के इलाज और व्यापार के लिए पैसे दिए। राजू ने बेटे का इलाज करवाया और फिर शुरू किया फल-सब्ज़ी का व्यापार।


👩‍🦱 सविता:
“राजू जी, चलिए हम खेतों में फल उगाते हैं, आप बाजार में बेचिए।”

🎙️ [Narrator]
धीरे-धीरे राजू का व्यापार बढ़ने लगा और वह गांव का सबसे अमीर व्यक्ति बन गया।


🎙️ [Narrator]
एक दिन उसका वही दोस्त मोहन मदद मांगने आया, जिसकी पत्नी बीमार थी। राजू ने बिना कुछ कहे उसे पैसे दे दिए।


👨‍🦰 मोहन (लज्जित होकर):
“राजू, आज मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ। तुम सच्चे दोस्त हो।”


🎙️ [Narrator]
राजू ने फिर उस दयालु व्यापारी अशोक भैया से मिले पैसे लौटाने के लिए उसी जगह जाकर खोजबीन की, लेकिन वहां कोई और ही आदमी मिला…


👴 बुज़ुर्ग व्यक्ति:
“बेटा, मैं तो यहां 30 साल से रह रहा हूं… ऐसा कोई आदमी यहां नहीं रहता।”

🎙️ [Narrator]
राजू हैरान रह गया… सविता ने कहा…

👩‍🦱 सविता:
“शायद वो कोई साधारण इंसान नहीं था… ईश्वर ने उसकी शक्ल में हमारी मदद की थी।”


🎙️ [Narrator – धीमे, भावुक संगीत के साथ]
तो देखा आपने दोस्तों, जो दूसरों की मदद करता है, ईश्वर भी उसकी मदद किसी न किसी रूप में जरूर करता है। हमें कभी भी अच्छाई से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए…

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