Scene 1: Medical Store
(Camera focuses on a worried girl at a medical store)
Aarav (Medical Store Owner): हां बहन जी, बताइए क्या चाहिए?
Riya (Crying): भैया, जल्दी से यह दवाइयां दे दो, मेरे पिताजी की हालत बहुत खराब है।
(Aarav जल्दी से दवाइयां देता है। Riya रोते हुए दवाइयां लेकर भाग जाती है, लेकिन जल्दबाजी में पैसे काउंटर पर ही भूल जाती है।)
Aarav (Looking at the money): अरे, यह लड़की पैसे यहीं छोड़ गई! भाईसाहब, क्या आप इसे उसके पास पहुंचा सकते हैं?
Kabir (Passerby): जी, क्यों नहीं। बताइए, वह लड़की कहां रहती है?
Aarav: तीन नंबर गली में, जल्दी जाइए।
(Kabir पैसे लेकर Riya के घर जाता है, लेकिन वहाँ का माहौल देखकर चौंक जाता है।)
Scene 2: Riya’s House
(Camera pans to Riya’s father lying on the bed, breathing heavily.)
Riya (Crying): पापा, कुछ नहीं होगा, डॉक्टर बस आते ही होंगे!
Riya’s Father: बेटी, मेरा वक्त पूरा हो गया है। मेरे बाद तेरा इस दुनिया में कौन होगा?
(Kabir यह सब देखकर भावुक हो जाता है। वह अंदर आता है और Riya को पैसे लौटाता है।)
Kabir: माफ कीजिए, ये पैसे आप मेडिकल स्टोर पर भूल आई थीं।
Riya: धन्यवाद, लेकिन आप कौन हैं?
(तभी Riya के पिता दर्द से कराह उठते हैं। वह Kabir का हाथ पकड़कर Riya के हाथ में रख देते हैं।)
Riya’s Father: बेटा, अब मेरा वक्त खत्म हो रहा है। मेरी आखिरी इच्छा है कि तुम मेरी बेटी से शादी कर लो। तुम एक अच्छे इंसान लगते हो।
(इतना कहकर Riya के पिता दुनिया को अलविदा कह देते हैं। Riya गहरे सदमे में चली जाती है।)
Scene 3: Unexpected Marriage
(Kabir अपने घर जाकर अपनी माँ Ayesha को सारी बातें बताता है, लेकिन Riya के हिंदू होने की बात छुपा लेता है।)
Kabir’s Mother: बेटा, अगर किसी की मदद के लिए ऐसा किया है तो बहुत अच्छा किया। अब उसे अपना घर समझने दो।
(Kabir, Riya से चुपचाप निकाह कर लेता है और उसे अपने घर ले आता है।)
Kabir’s Sister Sana: भाभी जान, पानी लीजिए।
(Riya पहली बार नोटिस करती है कि यह एक मुस्लिम परिवार है और चौंक जाती है।)
Kabir’s Mother: बेटा, तुम सफर में थक गई होगी। Sana, अपनी भाभी को उनके कमरे तक छोड़ आओ।
(Riya कमरे में जाकर रोने लगती है। Kabir अंदर आता है।)
Riya: आपने मुझसे इतना बड़ा सच क्यों छुपाया? मैं आपके साथ नहीं रह सकती!
Kabir: हमें आपको बताने का मौका ही नहीं मिला। अगर आपको हमारी माँ की कसम है, तो कृपया उन्हें कुछ मत बताइए।
(Riya कुछ सोचकर वहां रहने को तैयार हो जाती है।)
Scene 4: Cultural Differences
(घर में Riya को बहुत प्यार दिया जाता है, लेकिन वह खुद को अजनबी महसूस करती है। एक दिन, खाना खाते वक्त—)
Kabir’s Mother: बेटा, खाना लो।
(Riya अपनी थाली में सिर्फ वेज खाना रखती है।)
Sana: भाभी जान, आपने नॉनवेज क्यों नहीं लिया?
Kabir (संभालते हुए): Sana, डॉक्टर ने इन्हें नॉनवेज मना किया हुआ है।
(धीरे-धीरे Riya परिवार के साथ घुलने-मिलने लगती है।)
(एक दिन, Riya पूजा करना चाहती है, लेकिन घर में कोई मूर्ति नहीं होती।)
Riya: आपके घर में कोई मूर्ति नहीं है क्या?
Kabir: नहीं, हम खुदा की इबादत करते हैं। लेकिन अगर आपको भगवान की तस्वीर चाहिए, तो हम कल बाजार से ले आएंगे।
(Riya को यकीन नहीं होता कि वे उसकी आस्था का भी सम्मान कर रहे हैं।)
Scene 5: Love Begins to Bloom
(Kabir और Riya अब एक-दूसरे का ख्याल रखने लगे थे। एक दिन, वे साथ में बाहर घूमने जाते हैं।)
Riya: मुझे मंदिर जाना है।
Kabir: हां, क्यों नहीं।
Riya: क्या आप भी मंदिर चलोगे?
Kabir: हां, अल्लाह और भगवान अलग नहीं हैं, बस उन्हें याद करने का तरीका अलग है।
(वे दोनों मंदिर जाते हैं और फिर Kabir दरगाह जाने लगता है।)
Riya: जब आप मेरे साथ मंदिर आ सकते हैं, तो मैं भी आपके साथ दरगाह चल सकती हूँ।
(धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगते हैं, लेकिन कभी कह नहीं पाते।)
Scene 6: A Twist in the Story
(एक दिन, Riya के चाचा अचानक उसके ससुराल आ जाते हैं।)
Riya’s Uncle: अरे, तो यहाँ छुपी थी तू?
Kabir: भाईसाहब, आप कौन हैं और हमारे घर में इस तरह क्यों आए हैं?
Riya’s Uncle: मैं इसका चाचा हूँ, और ये लड़की हिंदू है! यह शादी मान्य नहीं है।
(घर में सब हैरान रह जाते हैं। Shama, Kabir की बहन, भी चौंक जाती है।)
Riya: हां, मैं हिंदू हूँ, लेकिन इस परिवार ने मुझे इतना प्यार दिया है, जितना कभी किसी ने नहीं दिया।
(Kabir का गुस्सा फूट पड़ता है। वह Riya के चाचा को बाहर निकाल देता है।)
Scene 7: Acceptance and Happy Ending
(Shama गुस्से में Kabir को थप्पड़ मारती है।)
Shama: ये थप्पड़ इसलिए नहीं मारा कि तुमने शादी की, बल्कि इसलिए कि हमें ये बात किसी और से सुननी पड़ी!
Kabir’s Mother: हमें इस समाज की परवाह नहीं करनी चाहिए। इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। Riya, तुम जैसी हो, वैसे ही रहो। हमें तुम जैसी बहू चाहिए थी।
(Riya की आँखों में आँसू आ जाते हैं।)
Riya: मुझे लगा, आप लोग गुस्सा होंगे…
Kabir’s Mother: बेटा, प्यार और रिश्ते इंसानियत से चलते हैं, धर्म से नहीं। अब हमें तुम्हारा असली नाम बताओ, ताकि हम तुम्हें तुम्हारे नाम से बुला सकें।
(सब हंसने लगते हैं, और Riya खुशी-खुशी दोनों धर्मों का सम्मान करते हुए परिवार के साथ रहने लगती है।)
Scene 8: समाज का दबाव
(कुछ दिन बीत जाते हैं, लेकिन Riya के चाचा हार मानने को तैयार नहीं होते। वे समाज के कुछ लोगों को लेकर Kabir के घर आ जाते हैं।)
Riya’s Uncle (गुस्से में): यह शादी गैरकानूनी है! हम इसे मान्यता नहीं देंगे। या तो Riya हमारे साथ चले, या फिर अंजाम बुरा होगा!
Kabir’s Mother (गंभीर स्वर में): हमारी बहू जहाँ खुश है, वहीं रहेगी। हमें किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं।
(गली के कुछ लोग भी वहाँ आ जाते हैं और माहौल तनावपूर्ण हो जाता है।)
Society Member: इस लड़की को जबरदस्ती रख रखा है! इसे अपने घर भेजो!
Riya (मजबूती से): मैं जबरदस्ती यहाँ नहीं रह रही। यह मेरा घर है! मुझे अपने परिवार पर पूरा भरोसा है।
(तभी पुलिस आ जाती है, जिसे पड़ोसियों ने खबर कर दी थी।)
Police Officer: क्या यहाँ कोई जबरदस्ती हो रही है?
Kabir: नहीं सर, यह हमारी आपसी सहमति से हुई शादी है।
(Riya आगे बढ़कर पुलिस को सारी सच्चाई बताती है और कहती है कि उसे यहाँ कोई दिक्कत नहीं है। पुलिस वहाँ के लोगों को समझाकर भेज देती है।)
Scene 9: असली इम्तिहान
(एक रात, Riya अपने कमरे में अकेली होती है। वह सोचती है कि क्या उसने सही फैसला लिया है। तभी Kabir अंदर आता है।)
Kabir: क्या सोच रही हो?
Riya (आँखों में आँसू लिए): क्या सच में हमें कभी स्वीकार किया जाएगा? क्या हमारा रिश्ता हमेशा समाज की नजरों में गलत ही रहेगा?
Kabir: प्यार और इंसानियत कभी गलत नहीं हो सकते। हमें खुद पर और अपने रिश्ते पर भरोसा रखना होगा। अगर हम खुद मजबूत होंगे, तो दुनिया भी हमें स्वीकार करेगी।
(Riya पहली बार Kabir की ओर देखकर मुस्कुराती है।)
Scene 10: त्योहारों की मिठास
(त्योहार का दिन आता है। Kabir और उसका परिवार ईद मना रहे होते हैं, और Riya पहली बार उनके साथ त्योहार का अनुभव कर रही होती है।)
Kabir’s Mother: बेटा, आज हमारे घर की पहली ईद है तुम्हारे साथ।
(Riya मिठाई का डिब्बा लेकर आती है और सबको खिलाती है।)
Riya: और कल दिवाली है। क्या आप सब मेरे साथ दीप जलाएंगे?
Kabir’s Sister Sana (मुस्कुराते हुए): क्यों नहीं भाभी जान? हम सब साथ मनाएंगे।
(दूसरे दिन पूरा परिवार दीप जलाता है और दोनों त्योहारों को मिलकर खुशी-खुशी मनाता है।)
Scene 11: प्यार की जीत
(समय बीतता है, और धीरे-धीरे समाज भी इस रिश्ते को स्वीकार करने लगता है। Riya और Kabir दोनों अपने-अपने धर्मों का सम्मान करते हुए एक खुशहाल जीवन जीने लगते हैं।)
Kabir’s Mother: असली खुशी इसी में है कि हम इंसानियत को सबसे ऊपर रखें।
Riya: हाँ अम्मी, प्यार और सम्मान से बड़ा कोई धर्म नहीं।
(सब हंसते हैं, और कहानी एक सकारात्मक संदेश के साथ समाप्त होती है।)
Outro (End Message)
Narrator:
“दोस्तों, यह कहानी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक सीख भी है कि प्यार और इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो इसे लाइक, शेयर और कमेंट करना ना भूलें! क्या आप भी मानते हैं कि सच्चे रिश्ते किसी मज़हब से ऊपर होते हैं? अपनी राय हमें कमेंट में बताइए!”